परिचय
वरिष्ठ पत्रकार व्योमेश चन्द्र जुगरान की नई पुस्तक 'पहाड़ के हाड़' उत्तराखंड राज्य आंदोलन, राज्य बनने के बाद के हालात, पर्यावरण, पर्यटन व सांस्कृतिक विमर्श का एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसे उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून ने प्रकाशन हेतु अनुदान के लिए भी चुना। पुस्तक का लोकार्पण हाल में देहरादून में अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल ले.जनरल गुरमीत सिंह ने किया।
‘पहाड़ के हाड़’ की भूमिका नवभारत टाइम्स के पूर्व संपादक संजय खाती ने लिखी है। वह लिखते हैं-
"उत्तराखंड बनने के बाद इतना वक्त गुजर चुका है कि एक नई पीढ़ी आगे आ चुकी है। इसलिए बहुत मुमकिन है कि उस पूरे संघर्ष के इतिहास को जनमानस भूलने लगा हो। व्योमेश के इस संग्रह में हम मकसदों और बलिदानों के उसी कमिटमेंट को याद दिलाने की भरपूर कोशिश देखते हैं। आज अगर कोई उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास का गवाह बनना चाहता है तो उसे इस सामग्री से गुजरना ही होगा। तभी उसके मन में यह भाव घनीभूत हो सकेगा कि क्यों उत्तर प्रदेश से अलग होने की जरूरत समझी गई और तभी आज के उत्तराखंड का आकलन हो सकेगा।"