00:00गया श्राद के अंतरगत त्रिपाक्षिक श्राद जो करते हैं तो पुनपुन नदी का महत्त बताया है वो चेवन रिसी के उससे निकला हुआ है उसकी वह एक पावन नदी है और वहाँ पर जो अन्य छेत्रों में मुंडन आदी नहीं कराते हैं चुकि गया में श्राद पक्
00:30भावना बस लोग कर लें तो गया से बाहर यानि यह महाले पर्व जो है पुर्णिमा श्राद तक का होता है इस बीच में मुंडन आदी जो त्रिपाक्षिक श्राद करते हैं वह शौर कर्म आदी दाड़ी वगर नहीं बनाते हैं तो इसकी सुरुवात करते हैं जो अन्य त
01:00और पिंदान की शुरुवात करके गया से प्रवेश में खराए और किर गया में प्रवेश करके अपने पितरों का स्राद्ध करें और उसके जगह पर विकल्प रूप में हमारे गोदावरी तीर्थ का महाकन बताया गया है पुरान में कि जो वहां नहीं जाना जिन से संभ�
01:30नहीं जाने से उसके स्राद्ध कर्व में किसी प्रिकार के पुंपुन ना करने की कमी नहीं रहा है तो फल दोनों का बराबर गया है उसमें स्विप लिखा है कि पुंपुन या गोदावरी या करना आवश्यक है
01:46पुर्णीमा से अमावश्या तक कातिति होता है जिसको हम लोग 16 दिनों का पक्ष मांते हैं
02:16पित्री गारे के लिए महालय पर्वती थी जो है तो इसलिए शुर्वात जो है जो स्राद्ध है गया के अंतरगत है वो महालय पर्व के आरंब से हो जाता है
Be the first to comment