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Transcript
00:00किसान हर रोज सिंगाडे उबालता था और मजे से खाता था
00:03कबूतर किसान के लिए तालाप से सिंगाडे टूकरी में भर करनाता था
00:06दोनों खुशी से रहते थे
00:08एक दिन जब कबूतर तालाप से सिंगाडे लेने गया तो तेज वहर में दूँच जाता है
00:12जब कबूतर शाम तक घर नहीं आता तो किसान कबूतर को ढूनने लगता है लिकिन किसान को कहीं भी कबूतर नहीं मिलता है बहरोने लगता है तब ही कबूतर ओरता हुआ आ जाता है फिर लाइक सब्सक्राइब नहीं किया
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