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RadhaKrishn Maiya Yashoda ka prem राधाकृष्ण #radhakrish #starbharat EPISODE-21

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Transcript
00:00तुम्हारा इतना साहत किस नहीं बेगाम
00:13मैं यह यह
00:16हम इतने ही नहीं
00:20महराज कंस की सेना इस गाओं के बाहर पुरी तरह तैयार है
00:24तुम गॉाले हमारा मताबला नहीं कर सकते
00:30सोच लो
00:31हमें कृष्ण को सौप कर
00:35सबका जीवन बचाना है
00:37या विवा की यग्यकस्तान पर
00:39पूरे बरसानी की चिता सजानी है
00:53चास्त्रों में भी कहा गया है
00:55एक के बलिदान से यदि पूरा गाओं बसता है
00:58तो वो उचित है
01:00लेने आप सबका
01:02दो प्रहार हम प्रतिक्षा करेंगे
01:12उसके पश्चाथ
01:14प्रहार
01:17आए
01:32उन्हीं क्रेश्ने क्यों चाहिए
01:34क्रिश्ने केवल क्रिश्ने ये मेरा गाओं कहां पड़ गया है
01:46मेरा क्रिश्ने क्यों
01:48मेरे लल्ला ने किसी का क्या बिका रहे है
01:51नेरी मालक है मेरा लल्ला
01:54मैं उसे नहीं दूँगी
01:56और उस क्रूर कंज को तो कभी भी नहीं
01:59जी जी संफाली अपने आपको
02:04आवाशे ही ने कोई बड़ा प्राम हुआ होगा
02:07मेरा होगा
02:24मैं यह
02:29लल्ला
02:30लल्ला
02:31मेरा काना
02:33तू कहीं नहीं जाएगा
02:36तू अपनी मैया को चोड़के कहीं नहीं जाएगा लल्ला
02:39तू मेरा लल्ला है
02:41मैं तुझे किसी के पास नहीं बेजूगी
02:43और उस क्रूर कंज के पास तो कभी भी नहीं
02:46समझा तू
02:49तू कहीं नहीं जाएगा ना
02:51पुर्ट ही नहीं जाएगा ना?
02:56कें तुख, क्रिशिना से क्या शतुर्थ हो सकती है महराज कंज के?
03:08तुमने तो सुना ही होगा, मुझे लेकर हुई भरिश्वानी के विशे में और उस बालक के विशे में भी
03:14तो ये भी सुना होगा, कि वो गौकुल में कही है?
03:16कही आकासवानी वाला भालक क्रिश्टत नहीं?
03:46ये आप सब मेरी ओर इस परकार क्यों देख रहे हैं?
04:03महिया आप रोईये मत ना?
04:10महराज कंच को अवश्य कोई भ्रह्म हो आओगा आप रोईये मत
04:14महराज कंच जैसे महावली से लड़ पाना?
04:28सपने में भी नहीं सोच सकता मैं तो
04:31है ना?
04:41मैं ठहरा गोकुल का अबोध ग्वाला
04:44महराज कंच का सामना मैं कैसे कर सकता हूँ?
04:53मुख्या जी समय अधिक नहीं है
04:56हमें तुरंटने ड़न लेना होगा
04:59अन्या था दोपार पस्टात
05:01वर्साने का विनाश तो निश्च था
05:04हरी जटीलक आखी
05:09आपको बड़ी शिग्रता है मुझ जैसे अबोध को कंच को सौब देने की
05:14मैंने क्या विगाणा है आपका?
05:19हाँ? यह ऐसा क्यूं कह रही है?
05:22मैं तो महिया को चोड़के कभी बाहर भी नहीं गया हूँ
05:34और आप तो मुझे?
05:36नहीं नहीं
05:39मुझे ऐसे क्यों डरा रही है अब मत डराईए न
05:41मैंने क्या किया है?
05:45चटीला काकी
05:47अब फिर मुझे डरा रही है न
05:59ऐसे तो
06:01मुझे चक्कर आ रहे है
06:06अब बुच्छे चक्कर आ रहे है
06:07प्रेश्न
06:19प्रेश्न
06:23प्रेश्न
06:25स्वायम तो नाटक करता ही और मुझसे भी करवाता है
06:39काना
06:40काना
06:43काना
06:44काना
06:46लल्ला क्या होगे पेरे लल्ला को
06:49काना तो मुर्चित हो गया माईय
06:51वैदेजीत
07:15अकिर हुआ क्या है हमारे लल्ला को
07:18लक्षणों से तो ग्यात ही नहीं वो पा रहा है
07:20केने हुगा क्या है
07:22पर घबराने के कारण द्वर चड़ गया है
07:26ऐसा मेरा अनुमान है
07:27फिर भी मैं और श्टी दे देता हूं
07:29आसा है
07:30स्वास्त सुधरेगा
07:32प्रिश्ण
07:34वैदेजी
07:38अभी आउश्यदी की नहीं
07:42केवल आशिरवाद और प्रांक्थना की अवशक्ता है
07:46नहीं नहीं मैया मत रोईये
07:54मत रोईये आप मत रोईये
07:56इस जीवन में आना जाना
08:01जाना
08:02सब
08:03इश्वर के हाथ में है
08:05हमारे हाथ में कुछ नहीं है
08:08आप ही कहती है कि इश्वर जो करता है उचित करता है
08:12आप चिंतितना हूईये भईया
08:15चिंतितना हूँ
08:17कंज के जैनिक भाहर तेरी प्रतिक्षा कर रहे है
08:21और दू कहते चिंतितना हो
08:24कितना नेर्दहिया दू
08:26कानः
08:29कानः
08:31आप सभीने विश्चराम करने दीजिए
08:34अन्यथा स्वास्त और बिगड़ेगा
08:37मुझे समझ में नहीं आ रहा है कानः
08:44कि जब एकने एक दिन कंस का सामना करना ही है
08:47फिर इतना नाटक क्यों
08:50यदे तुम्हें नहीं आना है तो ठीक है
08:54मैं अकेला ही चला जाता हूं कंस के सामने
08:57दाओ ये मत भूलिये हम अभी भी मनुष्य की सीमाओं में बंदे हुए हैं
09:04हम कंस के सामने नहीं जा रहे हैं
09:09क्योंकि कंस के सामने जाने का समय नहीं है
09:13उसके बाप का घड़ा छलक नहीं दीजिए
09:17तब तक के लिए
09:19दुर्बल और असाय बनना ही उचित हो गया
09:23वो फिर भी ठीक है का न
09:25किन्तु जिसने भी हमारे यहां होने की सुचना उस कंस को दी है न
09:29उसे तो मैं जाटीला का कि
09:30क्या?
09:43उन्हें तो मैं नहीं छोड़ों का काना, कदा पे नहीं नहीं दो
09:48दंड देना बहुत ही सरल है
09:56किन्तु महत्वपूर्ण है जिसने भी वो भूल की है
10:00उसे उसकी भूल का आभास करा तब ही वो सही मार्क पे आते है
10:06दंड देने से नहीं
10:08किन्तु काकी ने संपूर्ण परिवार के प्राण संकट में डाल कर ठीक नहीं किये
10:15वही तो काना
10:16और उससे भी बुरा की है
10:18मैया को रुला कर
10:21तो अब अब निया यही कहता है कि एक माता के अश्रूओं का मोल केवल दूसरे माता के अश्रूओं से पूर्ण होता है
10:40कि यदि आज एक माईया अपने पुत्र काना के लिए रोई थे तो अब दूसरी माईया अपने पुत्र आयन के लिए रोईगे
10:57अर्था अब आयन की बारी
11:10सब चुप क्यों गड़े है
11:17मेरे काना को मचाने के लिए कोई कुछ सोच क्यों नहीं रहे
11:22मुझे तो ये बात समझ में नहीं आ रही है
11:24कंस के लोगों को गोकुलवासियों के यहां रहने की सूचना किस ने थी
11:35और कौन होगा काका
11:37गर का भेदी लंकाड है वो जो कोई भी है इस समय हमारे मद्धि में ही खड़ा है
11:51परतु ऐसा कैसे हो सकता है बल्राम
11:54मुख्या जी के सामने ही सारे गावालों ने बचन लिया था
11:58ये गोकुलवासियों की यहां होने की सूचना
12:02बुफत रख ही जाएगी थी
12:04है ना
12:09हाँ
12:11किन्तु वचन लेने में
12:13और उसे निभाने में बहुत अंतर होता है जटी लखाके
12:24अब गोकुलवासि तो यह सूचना स्वैम देने से रहे
12:28इसका अर्थ स्पष्ट है कि यह किसी बरसाने के कप्टी और विश्वास घाती का ही कार्य हो सकता है
12:43और इस संकट से निकलने का इस समय मात्र एक ही उपाय दिखाई दे रहा है मुझे
12:54कुंट सोपाय
13:06मैं और आयन कांच की सेना का सामना करेंगी
13:23अच्छा किया रहा था तुम आगे मेरे अंतिमपलों में तुम मेरे पास हो
13:34तुम्हारी आखों में अश्रू हो कहीं तुम मेरे लिए चिंतित तो नहीं हो
13:50नहीं तो
13:54अब तो मेरे जीवन के कुछ ही पलशेश है
14:06अब तो सत्य बूल दो रहा था
14:11अब तो
14:26झाल झाल
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