00:00कमल के केवाद स्वच्छ फूल ही एक अत्रित करूँ दूशित फूलों को दूर ही रखना ये लोग जितने फूल मिले सब ले आने सती के लिए इतना करना संभब नहीं होगा
00:24यह सब क्या है देदी तेरी प्राइश्चित के लिए तैयारी प्राइश्चित मेरा है मुझे सिद करना है कि मैं इसे पूरा कर सकती हूँ
00:37मुझे किसी की आवशक्ता नहीं
00:42सती, एक तो तुम निराहा रहोगे
00:45उपर से इतनी कड़ी थूप में
00:48कमल ढूड़ने कहां कहां भटकोगी
00:49तुम कमल की फूलों पर विश्नु नाम लिखना आरंब करो
00:54मन को शांत करो
00:55पर इस सब बाहर के काम करने के लिए दासिया है न
00:59नहीं दीदी, कदापी नहीं
01:03इस प्राइश्चित से सम्मंधित सारे कारे में स्वयम करूँगी
01:06फिर वही हट
01:07कैसे करोगी प्राइश्चित पूरा
01:10बताओ हमें
01:12तुम भूल रही हो
01:13कि तुम्हारा प्राइश्चित समय भद्ध है
01:16यदि सारा दिन तुम कमल के फूल एकरत्रित करती रहोगी
01:20तो विश्णू नाम कब लिखोगी
01:21इदी, मैं जानती हूँ मैं क्या कर रही हूँ
01:24कुछ नहीं जानती तुम
01:25कुछ नहीं पता तुम्हे
01:27तुमने क्या सोचा
01:31कि अपने प्राइश्चित में और सफल होकर
01:34तुम अपने प्राण त्याग दो की
01:35उसके पश्चात पिताजी पे क्या बीतेगी
01:40यह सोचा है तुमने
01:42या तुम केवल अपने ही बारे में सोचती हो
01:47तुम्हारा प्राइश्चित
01:50तुम्हा ही सपलता
01:51और जब पिताजी को ये पता चलेगा
01:56कि प्राइश्चित पूरा करने के लिए
01:58मैंने आप सब की सहायता ली
01:59तो क्या वो प्रसन्य होंगे
02:02सती तो
02:03सती बिलकुल ठीक कह रही
02:04लेकिन मा
02:20ये प्रजापती दक्ष की पुत्री है
02:23अपने संकल्प में ध्रेने
02:26ये अपने पिता से इतना प्रेम करती है
02:30कि अपने प्राइश्चित को पूर्ण करने के लिए
02:33कुछ भी कर सकती है
02:35पिता जी कैसे है
02:38अपने पुत्री को इतना कठोर दंड देकर
02:41वो केवल व्याकुल ही हो सकते हैं
02:44चया, नियती
02:54तुम दोनों प्रती दिन सती के साथ रहोगी
02:59और जितने भी कमल के फूल इकत्रित करके भवन ले जाये जाएंगे
03:04उसमें तुम सती की मदद करोगी
03:07जी
03:11जाओ, अपना संकल पून करो
03:41जाओ, अपना संक्रावी
03:47जाओ, जाओ, जाओ, जाओ
03:51पिता पाग्यासर धार कर
04:08निकले पड़े दुखियारे
04:20मेहन की राज कुमारी
04:26मेहन की राज कुमारी
04:32एश्वत
04:36मेरी सत्थी पे अपनी कृपाद रिष्टी बनाए रखना
04:50पिता पाग्यासर धार कर
05:02निकले पड़े दुखियारे
05:08मेहन की राज कुमारी
05:14मेहन की राज कुमारी
05:20केवल इतने ही कमल के फूल
05:26केवल इतने ही कमल के फूल
05:38के फूल
05:40कोई बार ने
05:42इन्हें तो एक अत्रूप करें लेते हैं
05:50मैंने क्या किया
05:52सत्दी की सहायता करने निकली थी
05:56इसका कार्यों और भी घटिन बना दिया
06:00क्यों
06:06ऐसा क्या किया तुम ने
06:10हाँ
06:12आसपास के जितने भी कुण थे
06:16आसे सारे कमल
06:18पर पहली इक मंगवा चुकी
06:20अब सती को कमल लाने
06:32नचानी कितनी दूर दूर तक भटकना पड़ेगा
06:34तक भटकना पड़ेगा
06:36सुख में भव की छापनी जो
06:46ऐसी दिल सुपो मन काया
06:52क्या सच मुच पपराद था ऐसा
06:58जिसका दंड कठोर भी पाया
07:04जिसका दंड कठोर भी बाया
07:10मन परमानों बीद रहा है
07:20हर एक्षण युग सा भाय
07:30मने जी
07:32भटक रही दुख्यारी
07:38महर की राज कुमारी
07:44वक त्यार दंड के रहा है
07:54कि तुख्यों रहा है
07:58कि युख्यों अफिए
08:12झाल झाल
08:42आसपास के सारे तालाब से अधिक्रिष्ट कमल पहले ही एकत्रित कर भवन में पहुचा दिये गए हैं
08:50ठीक कहा तुमने, हमें और आगे जाना होगा
08:57मेरी मानिये तो अभी हमें वापस चलना चाहिए
09:00संद्या होने को है और अंधेरिये में इस स्वन से लोटना उचित नहीं होगा
09:05समय नहीं है मेरे पास
09:08कमल एक अत्रित कर आज मुझे उन पर विश्णू नाम लेखना आरम करना होगा
09:13वो देखो वहाँ मुझे लगता है वहाँ हमें कमल के फूल अवश्य मिलेंगी चलो
09:27जया नियती तुम दोनों भवन वापस लोट जाओ
09:45नहीं हम आपको छुड़ की नहीं जाने वाले हैं
09:48तुम दोनों मेरे साथ आई हो इसलिए मेरे आदेश के अधीन हो
09:52मैं जो कुछ भी कहूं तुम्हें मानना ही पड़ेगा
09:55मेरी चिंता मत करो थोड़े और कमले कत्रित कर लूँ फिर मैं भी लोटाओंगी
10:03लाओ जी मुझे दे दो
10:06तुम दोनों जाओ
10:12लाओ
10:13लाओ
10:14लाओ
10:15लाओ
10:16लाओ
10:18लाओ
10:28लाओ
10:30प्राइब करता
11:00विर्ख में लिर्ख ग्याज जिर्ख लिर्ख ग्याजिगा
11:30उस तुछ शिल्पकार का इतना दुस्साहास कि मेरे बुलाने पर भी वो नहीं आया
11:44नहीं प्रजबती द्या कीजिए द्या कीजिए मेरे पुत्र का कोई दोश नहीं है
11:56उसे तो इसकी जानकारी भी नहीं वो तो मूर्ती निर्मान के लिए गंधर्व लोग गया हुआ है
12:03इश्वर साक्षी है प्रजापती के हमने सदाई आपके नियम आपके द्वारा स्थापत जीवनशैली का पालन किया है
12:15आपके आशिरवाद और प्रोत्साहन से ही हमें सब कुछ प्राप्त हुआ है
12:23आपके साथ चल नहीं प्रजापती नहीं
12:29चल करना तो दूर हमने तो कभी सपने में भी इसका विचार नहीं की
12:34हमें से किसी को भी इसकी जानकारी नहीं थी प्रजापती
12:39मैं इन सब का मुख्या आपको वचन देता हूं प्रजापती के दुबारा ऐसा नहीं होगा
12:47खेवल अंतिमबार क्षमा करतीजी
12:53क्षमा करतीजी
12:55शमा तो मैंने अपनी पुत्री को भी नहीं किया
13:04जबकि उसका दोश केवल इतना था
13:11कि उसने अपने पिदा के मान को बचाने के प्रयास में रमित हो गई थी
13:18किंतु शिल्पकार ने मेरी पुत्री को मेरे विरुद्र भ्रमित करके
13:27खोर अपरात किया है
13:29और जिसके लिए उसे कठोर से कठोर दंग
13:34परयाब्त नहीं होगा
13:39इसलिए इस अपरात का बोच तुम सब को उठाना पड़ेगा
13:48इस दंड में तुम सब को भागीदार बनना पड़ेगा
13:53मैं प्रिजापती दक्ष ये घोशना करता हूँ
14:02कि मेरे इस सब्समाज में इन लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है
14:10मैं इस सब्समाज के लोगों को अपनी सब्समाज से पाइशक्र करता हूँ
14:25कि यदि किसी ने भी इनकी सायता की या इनके प्रदीस सानबुदी दिखाई
14:35तब वो मेरे दंड का अधिकारी होगा
14:39नहीं दया प्रदापती दया आप मुझे देदी जी जो भी दंड देना चाहते
14:46परंतु हमारी इस्त्रियां हमारे शिचू इनके सर से अपना हाथ मत अठाईए
14:56मेरे लेकर कहां कहां बटकूगा मैं कैसे पोशिन करूगा उनका
15:04कहां सर चुपाऊंगा मैं कहां
15:10कहां सर झाल
15:28कहां सर दूपाँ
15:31कर दो कर दो
16:01कर दो कर दो
16:31कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर दो कर �
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