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"इस कहानी में एक अनोखी सीख छुपी है जो आपके जीवन को बदल सकती है! यह कहानी न केवल बच्चों के लिए बल्कि बड़ों के लिए भी एक प्रेरणा साबित होगी। अगर आपको नैतिक कहानियाँ (Moral Stories), प्रेरणादायक कहानियाँ (Inspirational Stories) और हिंदी लघु कथाएँ (Short Stories in Hindi) पसंद हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है। पूरी कहानी देखें और अपने विचार हमें कमेंट में बताएं!
🔹 वीडियो की खास बातें:
✅ सुंदर एनीमेशन और इमोशनल कहानी
✅ हर उम्र के लिए अनुकूल
✅ सीखने और समझने योग्य नैतिकता
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00:00पंडिची गुंजन के घर जाते हैं जो की खुले खेत में चावनी बना कर गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे।
00:05खेत के पास ही जंगल सटा होने की वज़े से जंगली जीव जन्तूख खेत में मंडराते थे जहां गुंजन बरतन मांज रही होती है और उसकी गरीब मा चूलहा लगा कर खाना पका रही थी।
00:35खेत में सबजी बोकर बेच कर दो टाइम के पेट पालने का गुजारा करती हूँ।
01:05जब बहु शादी करके आती है तो घर भराई की रस्म करवाई जाती है ताकि घर में कभी कोई घटी ना हो।
01:09आए चोटी भाबी हमारे परिवार में आपका स्वागत है।
01:13जब बहु शादी करके आती है तो घर भराई की रस्म करवाई जाती है ताकि घर में कभी कोई घटी ना हो।
01:21इसका लश को अपने सीधे पैर से गिरा कर घर भराई करो।
01:25जी मा गुंजन ग्रह प्रवेश करके अंदर आती है।
01:30भागिवान अब बहु को कमरे में भेज दो सफर के ठके आरे आए है ठेंड का मौसम भी है।
01:35हाँ जी बस मिथिलेश बेटा बहु को कमरे में ले जा।
01:39सभी लोग भी आराम करने कमरे में चले जाते।
01:42मिथिलेश गुंजन को कमरे में लाता है जहां हर सुक सहूलियत की चीज लगी थी।
01:46कमरा देखने में काफी बड़ा आलिशान था।
01:48मिथलेश जी जग कर पूछता है
01:49गुणजन जी, आज से हम दोनों इस कमरे में रहेंगे
01:53वैसे मैंने आपकी पसंद के हिसाब से थोड़ा बदलाओ किया है
01:56आपको कमरा पसंद तो आया ना?
01:58जी कमरा बहुत अच्छा है
02:00जी वो मैं पूछ रही थी
02:01मैं जो अपने कपड़े साथ लेकर आई हूँ
02:03उसे कहां जचा दूँ?
02:06मैंने अलमारी में आधी जगा खाली करती है
02:08आप कपड़े वहां सेट कर लेजिए
02:10या फिर मैं आपकी हेल्प करवाता हूँ
02:12इसी तरह मिथलेश गुणजन के साथ बाते बढ़ाता है
02:15थोड़ी देर बात कहराने के साथ ठंड बढ़ जाती है
02:17कमरे की चमचमाती शीशे की खिरकी से ठंडी ठंडी बरफीली हवा अंदर आने लगती है
02:22जी मैं खिरकी बंद करके आती हूँ
02:24ठंडी हवा अंदर आ रही है
02:26ठीक है
02:28जैसे ही गुंजन किड़की बंद करके आती है तो मिथलेश तौफे में नेकलस देता है
02:33गुंजन ये नेकलस मैंने तुम्हें शादी के तौफे में देने के लिए बनवाया था
02:37सोचे तुम पर अच्छा लगेगा
02:39इतना मेंगा नेकलस देखकर गुंजन से कुछ कहते नहीं बनता है
02:43क्या मैं इसे बाद में पहन सकती हूँ
02:46आप तो जानते हैं शादी से पहले मेरा रहन सहन बहुती साधारन और गरी भी भरा था
02:51इस नए परिवार में आकर एक साथ इतनी खुशिया मिल रही है कि समेट नहीं पा रही हो
02:56अब तो इन खुशियों के आदर डालो रही वाद इस तौफ़े की तो तुम्हें जम मन हो तब पहन लेना
03:02इसी तरह अगला दिन शुरू होता है तभी कुछ सरकारी अधिकारी आकर पूछ ताज करते हैं
03:08अरे भया क्या यह मनोहर जी का घर है?
03:11हाँ जी सर यह मनोहर जी का घर है हम उनके बेटे हैं पर क्या बात है?
03:15अरे देखे आप लोगों ने जिस जमीन पर यह घर बनवाया है वो सरकारी जमीन के अंडर आती है
03:21आप लोगों को यह घर खाली करना पड़ेगा
03:23यह सुनकर सभी सदस से चिंता में पढ़ जाते हैं रेवती की आँखों में आसु आ जाते हैं
03:28अरे ऐसे कैसे आप हमें हमारा घर खाली करने के लिए कह सकते हैं यह हमारा घर है एक एक पैसा जोड़ जोड़ कर हमने यह घर बनाया है
03:36कोई हमें हमारी जमीन से नहीं निकाल सकता है
03:39देखे माताजी आप इस तरीके से हमसे बात नहीं कर सकते हम बस अपना काम कर रहे हैं तो आप भी हमारे साथ कोपरेट कीचिए और नर्वी से पेश आईए
03:47मा आप शान्त हो जाएए भावी मा को समालिए
03:51सर आपके पास कोई नोटिस है हमसे घर खाली करवाने का
03:55अधिकारी धमकी सुना कर चला जाता है डबडबाई आँखों से मनोहर घर की दीवारों को देखने लगता है तबी उसके सीने में दर्द उठता है
04:10राकेश के बाबुजी क्या हो गया तुमको राकेश देखना बेटा
04:20दोनों आखों में आसू लिए भहनकर ठंड में रेजिस्टरार दफतर जाकर बात करते हैं
04:32देखो जी आपके पास आपके मकान के पक्के पेपर नहीं है तो खाली मुझ से दावी कर देने से ये मकान आपका नहीं हो जाएगा
04:37अब तो एक ही तरीका है जिसे आप अपने मकान को बचा सकते हैं
04:41तो फिर जली से 4 लाग कैश जमा कर दो
04:53मैं कल तक पक्की रेजिस्ट्रे उठा ले आता हूँ और फिर ये मकान आपका ही रहेगा आप अपने परिवार के साथ जैसे मरजी चाहे रहें
04:59चार लाग की बड़ी रकम सुनकर दो भाई एक दूसरे का मू देखने लग जाते हैं क्योंकि सारे पैसे घर बनाने में लग चुके थे
05:06अरे चार लाग इतनी बड़ी रकम हम कहां से लाएंगे
05:10अभी हाल फिलाल में हमने घर बनवाया है उसमें सारे पैसे लग चुके
05:13आप कुछ कीजिए सर
05:14देखे मैं कुछ नहीं कर सकता भाई
05:17बस मेरी सलाम आनो तु जाकर अपना बोरी अब इस तर बांद कर
05:20गलखारी करने की तैयारी करो पकी रेजिस्टरी करवा कर दी
05:23इस नोटिस को रफादफा कर सकते हो पर तुम पर पैसे नहीं है
05:27और बिना पैसे के घर चुड़ा पाना चूना लगाने जितना आसान नहीं है वई
05:31ये लंच टाइम है आप दोनों बाहर जाईए अभी
05:33अरे तुम सरकारी मुलाजिम क्या सिर्फ मुफ्त की तनखा खाने के लिए बनकर बैठे हो
05:43गरीबों की बोटी नोच नोच कर अपनी जेब भरते हो
05:46और गरीबों को बे आसरा करके छोड़ देते हो
05:47दोनों निराश होकर घर वापस आते हैं
05:50अजी आ गया आप दोनों, क्या बात हुई है
05:52हमें हमारा घर खाली तो नहीं करना पड़ेगा ना
05:55सवीता, सामान बादों अभी हमारा घर नहीं रहा
05:58हमें ये घर छोड़ कर जाना पड़ेगा
06:00पर पापा मित्ते दिन के मौसम में घर छोड़ कर का पढ़ रहेंगे
06:04दोनों बच्चों को रोते देखकर गुंजन अपनी आँखों से आंसु पोचते हुए कहती है
06:11शालू बेटा, निखिल बेटा हम हमेशा के लिए थोड़ी घर छोड़ रहे हैं
06:16आज से हम सभी थोड़ी दिन के लिए घर घर खेलेंगे
06:18इसलिए हमको ये वाला घर छोड़ कर कहीं और जाकर रहना पड़ेगा
06:22और अगर हम गेम जीद जाएंगे तो वापस इस घर में आ जाएंगे
06:26निकल की बाते सुन सबकी आँखे नम हो जाती है
06:43दोनों बहु साथ ले जाने को थोड़ा बहुत सामान रख लेती हैं
06:46जैसे ही सब घर से निकलने लगते हैं, तभी सरकारी अधिकारी आ जाते हैं
06:50पूरा गरीब ससुराल आखरी बार अपने घर को देखते हुए सामान के साथ पीछे छोड़ जाते हैं
07:14सब को जाते देखकर विमला कहती है
07:15बे सहारा गरीब ससुराल भयन कर ठंड के मौसम में बटकते बटकते चले जा रहे थे
07:35लेकिन कोई उन्हें अपने घर में सहारा नहीं देता
07:37एक दो जने होते तो कोई भी रख लेता
07:40लेकिन इतने बड़े परिवार को भला कौन रखता
07:42ठंड इतनी कड़कडा कर थी सूरज ने भी अपना मौन नहीं दिखाया था
07:46काफी चलाओं के बाद सभी एक घने से जंगल में आ जाते हैं
07:50जहां छोटे छोटे गुफा जैसे गड़े जमीन के अंदर जा रहे थे
07:54जिसे जंगल की जादा तर जमीन धसी हुई थी
07:58तभी शालू जमीन के अंदर गहराई में छोटी छोटी गुफा में चीटी को कतार में चलकर जाते हुए देखती है
08:08तभी एक पेड़ की जड़ में से मोटा सा चुहा निकल कर चूचू करते हुए जमीन में जाती गुफा पे गुफा पे घुश जाता है
08:21निकल बेटा जंगल में रहने वाले जीव जन्तू इसी तरह जमीन के अंदर गुफा लगा कर या मांद बना कर रहते हैं क्योंकि इनको भी ठंड लगती है
08:39इसी लिए ठंड के मौसम में ये मिट्टी के अंदर गुफा बना लेते हैं ताकि उनकी शरीर को गर्माहट मिलती रहे
08:44सवीता की बात सुनकर निकल जमीन की गहराई में जाते उन गुफाओं को गौर से देखने लगता है
08:49फिर तो हम लोग भी जमीन के अंदर गुफा बना कर रह सकते हैं मम्मी इससे हमको भी ठंडी ठंडी नहीं लगेगी
08:56निकल की गुफा में बसावट करने की और रहने की बात अटपटी तो थी लेकिन कहर बरसाते मौसम में बे सहारा गरीब ससुराल वालों के लिए ये उपाए दो बते को तिनके के सहारे की तरह लगता है
09:07भाबी निखिलने अंजाने पन में भी एक सही बात कही है पहले जब हमारे पूरवज के पास घर नहीं हुआ करते थे तो वो लोग भी गुफा में ही रहन सैन करते थे क्योंकि गुफा मिट्टी और पत्थर के बने होते हैं इसलिए काफी जादा गर्माहर प्रदान करते है
09:37तो पहर सूज कर मोटे हो गए हैं पता नहीं गने जंगल में हमें शरल लेने की जगह मिलेगी की नहीं।
10:07करे के बीच में एक पत्रीला गुफा दिखाई देता हैं।
10:37जानवर ने मांद लगा रखा हो।
10:39अरे देखो शायद से वहाँ पर गुफा है।
10:43दोनों सर्दी से थर-थर कापते हुए सावधानी बरत कर अंदर जाते हैं।
10:47कुछ देर तक कोई हलचल नहीं होती तो सभी घबराने लगते हैं।
10:51इतले है श्राकेश, अरे का रह गए दोनों, बाहर आओ मेरा जी बहुत गबरा रहा है।
10:59मा, आप सभी लोग यहाँ पर रुकिए, मैं और भाया देखते हैं।
11:03पूरा ससुराल गुफा के अंदर आते हैं, जहां काफी जादा गर्माहट थी।
11:08लगता है इस गुफा के अंदर कोई भी जानवर आता जाता नहीं है, तबी तो यहाँ पर किता हुआ।
11:13ममी आपस सूखी घास भी हम इसे उखाद दे।
11:16बच्चे हैं लेकिन इसी सूखी घास को एकटा करके रखना आग जलाने के काम आएगा
11:22थोड़ी देर में गुफा साफ सुत्रा करके गुंजन सूखी घास से आग जलाती है
11:26सभी आग ताप कर शरी को गर्म करते हैं
11:28तबी जंगल से जानवरों के दहारने की आवाजे आती है
11:31गुफा बिलकुल खाली है और अंदर काफी जगा है हम आराम से इसमें बसावट करके रह सकते हैं
11:37गुंजन तुम भावी के साथ अंदर जाकर सफाई करो तब तक हम लकडियां इकटा करके लाते हैं
11:43तबी लकडि काटते हुए दोनों भावी को जमीन पर धम धम भारी जानवर के चलने की आवाज आती है जिससे डर के मारे दोनों के पसीने चूट जाते हैं
11:52लगता है कोई जानवर हमारी तरफ बढ़ रहा है भाया इन जानवरों की सूगने की शक्ती काफी जाधा तेज होती है यहां से हमारा गुफा भी काफी दूर है अब ही कैसे बचा जाए तबी दोनों को काफी ठोस और मजबूत देवदार के पेड़ दिखते हैं दोनों अ�
12:22निकल को ऐसा बोलते देखकर रेवती रोते हुए उसे डांट देती है चपकर एकदम तू कुछ भी मुझे निकाल रहा है हरे हम लोग के चलते ही वो दोनों अपनी जान जोकी में डाल कर भोजन जुटाने गए पता नहीं कहां होंगे साल में होंगे बाहर तो कोहरा भी कित
12:52जी दोनों जहां खई भी होंगे सुरक्षित और महफूज होंगे मैं देखकर आती हूँ गुवा के बाहर कोहरे का घणा धुआ चलते देखकर सुमन गुझन को जाने से मना कर देती है भाबी गुफा के बाहर मत जाएए बाहर कोहरे के चलते कुछ भी नहीं दिख रहा है �
13:22तब ही दोनों लकडियां और खाने के लिए कुछ फल तोड़ कर लाते हुए दिखते हैं अच्छा हुआ जो आप दोनों आ गए माजी कब से चिंता कर रही थी इस जंगल में काफी जादा खतरनाक जानवर भरे हुए है यहां गुफा में रात के वक्त निकलना जान लेवा
13:52बेटा हम खाने का जुगार करने ही तो गए थे देखो कितने मीठे मीठे पके बेर शैतूत और अंजीर तोड़ कर लाए है अरे वा बेर ये तो मेरे पसंदीदा है शालू पके पके बेर देखकर चुल लेती है पूरा ससुराल थोड़े थोड़े फल मिलबाट कर खाकर ही �
14:22किस भाग में होंगे वैसे आपको पता है मितलेश भाहिया ये अंजीर ठंड के मौसम में खाना शरीर के लिए सबसे जादा लाब कारी है क्योंकि ये गर्म फल है जो शरीर को गर्माहर देता है खाने के बास अभी सूखे पुले का बिस्तर बिचा कर सू जाते हैं इसी तरह
14:52जंगल का पूरा भाग रात भर ओस गिरने से भीगा हुआ था हूँ हूँ हूँ कल तो किसी तरह थोड़ी बहुत फल खाकर हमने पेट का गुजारा कर लिया लेकिन जब तक हमें ठंड के मौसम में इस गुफा में बसावट करके रहना है तब तक खाना पकाना करने के लिए
15:22पानी का स्त्रोथ तो मिल ही जाएगा दोनों बहुएं ठंड में पानी और मिट्टी की तलाश के लिए गुफा से दूर दरात जाती हैं जहां उन्हें नदी दिखाई देती हैं जिसमें बिलकुल साफ शुद पानी कल-कल बह रहा है जिसमें धेर सारी बड़ी-बड़ी मच
15:52मेरे तो हाथ सुन पढ़ गए है मेरे बसकी नहीं इतने भर पीले पानी में से मचली निकालने की सविता नदी किनारे की सूखी जमीन से मिट्टी खोद लेती है वहीं गुझन धेर सारी मचलिया पकड़ कर के लेके पत्ते तोड़ कर उनमें रख लेती है अब दोनों वाप
16:22अराम से खाना खा सकते हैं अरे माजी मैं और गुंजन तो आ ही रहे थे रसोई की विवस्ता कर लेते हैं आप क्यों परिशान हो रही है बाहू तुम दोनों ऐसे बुरे वक्त में इस परिवार को साथ लेकर चल रही हो यही बड़ी बात है ठंड तो सबके लिए एक समाने म
16:52बटी में उन बरतनों को पका कर मजबूत करती हैं भाबी इस तरह से खुली रसोई तो जंगल का कोई भी जानवर तोड सकता है क्यों ना हम इसे पत्थर से घेराव कर दें ताकि जानवर हमारी रसोई को नुकसान ना करे सुमन का पत्थर से रसोई रखने का आईडिया सभ
17:22सभी को गर्मकरम खाना बना कर परोज कर खिलाती हैं इसी तरह वक्त बीतता है गरीब ससुराल वालों का ठंड भरी मौसम में गुपा के ससुराल में जीवन यापन जारी था अब देरे देरे ससुराल वालों के लिए उस घने जंगल में गुपा में रहना आमसा होने लगता
17:52जा एक तेंद्वा उसे खाने के लिए उसके पीछे लग जाता है ममी पापा बचाओ मुझको बचाओ मेरे पीछे तेंद्वा बढ़ गया है आखिर में सविता जोकी चूलहा लगा कर गुफा के बाहर की रसोई में खाना बना रही होती है वह निखिल को बचाती है इतने म
18:22नहीं थी वो घर शुरू से आप लोगों का ही था बस जिस अफसर का घर खरीद दर्ज करने का काम था उन्होंने उस जमीन को सरकारी जमीन में चड़ा दिया था आप जाकर अपने घर में वापस रह सकते हैं ये सुनकर गरीब सस्राल वालों के चहरे पर खुशी के सासाथ �
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