Skip to playerSkip to main content
  • 14 hours ago
दिल्ली में दंगा भड़काने वाले आरोपियों का फूलों के हार से स्वागत क्यों? देखें

Category

🗞
News
Transcript
00:00अगली खबर अब देश में पत्थर बाजी के उनमादी मॉडल का विशलेशन करेंगे जिसमें कभी पूरा शहर दंगे की आग में जुलस जाता है तो कभी आम लोगों से लेकर पुलिस वालों तक उसकी हिंसा का शिकार होते हैं
00:12पहला मामला दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों का है जिसके कुछ आरोपियों को सुप्रीम कोट ने जमानत दे दी और जब वो कोट के आदेश पर जेल से बाहर आए उनका इस तरह से स्वागत किया गया जैसे ये दंगे के आरोपी नहीं बलकि क्रांतिकारी निकले और कोई क
00:42पुलिस मस्जिद से काफी दूर थी अब जब दिल्ली पुलिस न आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफतार कर रही है तो सवाल उटता है कि खानूनी कारवाई के बाद जब ये आरोपी जमानत पर बाहर आएंगे
00:52क्या तब उनका भी ऐसे ही स्वागत किया जाएगा सबसे पहले दिल्ली दंगे के आरोपियों के जोरदार्ट स्वागत किये तस्वीरे देखे
01:00इज़र इज़र इज़र इज़र इज़र इज़र
01:17इज़र हुआ ज़र इज़र इज़र हाँ
01:43इज़र इज़र किन से participar
01:47दिल्ली के जिस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई
02:01उनके परिवारों के जखमों पर किस तरह नमक छड़का गया वो इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं
02:08दिल्ली दंगे के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोट ने उमर खालिद और शर्जील इमाम को जमानत देने से इंकार कर दिया
02:14लेकिन पाच आरोपी को कोट ने जमानत दी जिसमें गुलफशा, फातिमा, मीरान हैदर, शिफाव ररह्मान, मुहमद सलीम खान और शादाव एहमद शामिल
02:24इन में से चार आरोपी, गुलफशा, मीरान, शिफाव और सलीम, साथ जनवरी की रात को तिहार जेल से बाहर आए, पाचवे आरोपी के बेल बॉन्ड वरिफिकेशन में थोड़ा समय लगा
02:34लेकिन जब दिल्ली दंगों के ये आरोपी जेल से बाहर आ रहे थे, तो उनके स्वागत में ऐसा महौल तयार के आ गया था, जैसे वो देश के लिए कोई मिडल लेकर लोटे है
02:43जबकि ये वो लोग हैं जिन पर दिल्ली में दंगा भढ़काने जैसे गंबीर आरोप हैं और इन दंगों में तिरेपन लोगों की जान जा चुकी है
02:51इन आरोपीयों के स्वागत में जेल के बाहर खड़ी संख्या में बहुत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे
02:57परिवार के सदस्यों और वकीलों के अलावा बड़ी संख्या में समर्थकों की भीर थी
03:02हमारा सवाल ना परिवार के लोगों से है ना वकीलों से है
03:06सवाल ये है जो उनके हितैशी और समर्थक बनकर जेल के बाहर मौजूद थे
03:10किस बात के लिए इन्हें फूलों का हार पहना रहे थे
03:16किस बात के लिए इन्हें गले लगा रहे थे
03:20क्या इन्होंने देश के लिए कोई बड़ा काम किया है
03:24क्या इन्होंने समाज के लिए कोई योगदान दिया है
03:27ये वो लोग हैं जिन पर दिल्ली में दंगा भरकाने का आरोप है
03:30इतने गंभीर आरोप की सालों तक कोर्ट में इनकी जमानत भी अभी तक नहीं दी थी
03:35अब जाकर जमानत मिली है लेकिन अभी भी केस चल रहा है
03:39और अब जब जमानत मिली है तो कोट ने इन पर कड़ी शर्ते भी लगाई है
03:45ताकि ये कानूनी प्रत्विया को बाधित न कर सके
03:48जब कि ये लोग इने फूल का हार पहना रहे हैं गले लगा रहे हैं
03:51अभी तो केस चलना है पूरा
03:52सुप्रीम कोट ने इनको जमानत देते हुए कहा था कि ये दिल्ली से बाहर नहीं जा सकते
03:57इन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा वो किसी गवा से संपर्त नहीं कर सकते
04:01ऐसी किसी गतिवदी में शामिल नहीं हो सकते जो खानून विवस्ता के खलाफ है
04:05अगर ऐसा हुआ तो जमानत रद सोचे कोट ने इतनी शर्ते लगा दी है जमानत देने के लिए
04:12अभी केस चल रहा है आरोप गंभीर है ये इनके हीरो है इस जमानत का मतलब बरी होना नहीं है
04:25ये सभी दिल्ली दंगे के आज भी आरोपी है इन पर मुकदमा चल रहा है
04:35लोगों के परिवारों को चड़ाने वाला नहीं है क्या ये फूलों का हार उन लोगों का अपमान नहीं जिनके घर दिल्ली दंगे में जल गए
04:43आई भी अफसर अंकित शर्मा जिनके शरीर के टुकडे टुकडे करके गंदे नाले में फेक दिया गया था
04:50वो सब भूल गए क्या ये गंबीर अपरात के आरोपियों का महिमा मंदर नहीं ये ऐसे लोगों का नायक की तरह स्वागत करने में समाज में क्या संदेश जाएगा
05:02क्या इस्वागत सदकार से ऐसा नहीं लगता कि उन्हों ने जो किया वो अच्छा किया और आगे लोग ऐसा करने के लिए प्रेरित नहीं होगे जब अपरात और हिंसा कुछ सही ठहरा आजाएगा
Be the first to comment
Add your comment

Recommended