00:00विश्वबास दिवस पर हम आपको ले चलते हैं दिल्ली के सराय कालिखाँ इलाके में बने बासीरा पार्ख
00:16यह सिर्फ एक पार्ख नहीं बलकि प्रकृती और आधुनिक्ता का संगम है
00:21यमना नदी के किनारे पर बैंबू थीम पर बना बासीरा पार्ख परेवरल सनक्षन और सुन्दर्टा का अगभूत मिसाल पेश कर रहा है
00:30163 हेक्टेर में फैले बासीरा पार्ख में करीब 30,000 से अधिक भास के पौधे लगाए गए है
00:38बासीरा पार्ख ना सिर्फ जैब बिवित्ता बढ़ा रहा है बलकि प्रदूशित भूमी को हर्याली में बदल कर दिल्ली वासियों को स्वक्ष हवा और मनुरंजन की सुविदा भी मोहया करा रहा है
00:49बहुत ज़्यादा मुस्क्ष जाते हैं यहाँ पर दुपहर में रहना बैंबू की थीम है इसकी मैं देली में और किसी पार्ख में यह बहुत बैटर है बट थोड़ सा इनिसेट कर सकते हैं कि ज़्यादा पेड़ लगाए जिससे ज़्यादा सेड़ और आस पास में लोग �
01:19बहुत ज़्यादा से ढकी जमीन का निर्क्षिन किया और फिर बांस की थीम पर पार्ख बनाने की पहल की इसके बाद डीडिये ने अठारा महीने में इस पार्ख को विक्सित किया बासीरा पार्ख काने मान पूरी तरह बैंबू थीम पर किया गया है यमना नदी के किनारे �
01:49उद्देश से बास के प्रति लोगों को जागरू करना है क्योंकि परियावन स्ट्रक्षन के लिए बास बहुत ही महत्तोपूर माने जाते हैं इस वक्त मेरी मौझूदगी राजधानी दिल्ली के बसेरा पार्क में है बसेरा जैसा के नाम है आप नाम से ही समझ गये होंगे
02:19सबसे पहले आपका परिचे जाननत है दन्यवाद मेरा नाम पुरदीप मौरिया है मैं यहां का सायक निदेशक अर्टी कल्चर विवाग से हूं और जैसा कि सर ने पूछा कि बांस के क्या उपियोग है क्या इक्वीश की को नामिक वैल्यू है यह बांसेरा पार्क डीडि�
02:49जिसमें यह पार्क जहां पर बना है सरप्रतम तो हम पताना चाहेंगी जो पार्क यह बना हुआ है पहले यहां मलबा ग्राउंड था सी एंडी वेश थे सारा इंक्रोच्मेंट था तो हमारे माननी अलजी साहब के दिशा निर्देश से यह हुआ कि हम यहां एक खौपसूर
03:19बासेरा पार्क में सिर्फ हरियाली ही नहीं बलकि आधोनिक सुविधाएं भी हैं यह रिस्तना, मुजिकल फाउंटेन, वाकिंग ट्रेल्स, बच्चों के लिए खेल छेत्र, जलाशे और घास के बिस्तृत मैदान विक्सित किये गए हैं इसने ना केवल परियावरन बहाली
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