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  • 3 weeks ago

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Transcript
00:00दो बहुओं वाली सास
00:01सरस्वती की दो बेटे हैं
00:04बड़े बेटे राम की शादी रज्जों से हुई है
00:06और छोटे बेटे शाम के लिए लड़की देखने का सिलसिला जारी है
00:10एक दिन रज्जों की मा का फोन आता है और उसकी सास फोन उठाती है
00:15हेलो कान बोल रहा है
00:18दूसरी तरफ फोन पर रज्जों की मा लीलावती बोलती है
00:22हेलो समधन जी मैं लीलावती बोल रही हूँ रज्जों की मा
00:28अरे नमस्कार समधन जी कैसी हो बहुत दिनों के बाद याद की आज
00:34यहाँ पर तो सब कुछ छीक है, बस मेरी तब्यत थोड़ी खराब है, अगर बुरा न मानो तो एक बात बोलू
00:43अर कैसी बात करती है आपने सम्धन जी, आपकी बात का बुरा क्यों मानना, बोले बोले
00:48मेरी कुछ दिन से तब्यत ठीक नहीं है, और यहाँ पर मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं, क्या आप रज्जो को कुछ दिन के लिए मेरे पास भेज सकती है
01:00ठीक है, हम रविवार को रज्जो को छोड़ जाएंगे
01:04इतना कहकर सरस्वती फोन काड़ दीती है, और अपनी बहु को आवाज लगाती है
01:09रज्जो, ओ रज्जो, जल्दे यहाँ आना तो
01:14क्या हुआ माजी, कुछ चाहिए था क्या
01:17अभी तुम्हारी मा का फोन आया था, उनकी कुछ दिन से तब्यत खराब है
01:24वो तुम्हें बुला रही है, राम को फोन करके कह दे, कल की दो ट्रेन की टिकट करा देगा
01:30मैं भी जाओंगी तुम्हारे साथ
01:32इतना सुनते ही रज्जु राम को फोन करके सारी बात बताती है
01:37और दो टिकट के लिए बोल देती है
01:39शाम को खाने के टेबल पर सब रज्जु के जाने की बात करते हैं
01:45तब रज्जु का देवर शाम कहता है
01:46भावी आज बहुत खुश लग रही हो
01:49माई के जाने की इतनी खुशी है
01:52खुश क्यों न हूँ देवर जी
01:56कितने दिन बीद गए अपनी मा से मिले
01:59और इस बार तो मैं महीना दो महीना रह करी आओंगी
02:03जब आपका मान करे तब ही आना
02:06अच्छा एक बात तो बताओ
02:07वहाँ से क्या लाओगी मेरे लिए
02:09देवर जी कहो तो देवरानी ले आओ
02:13वैसे भी सभी घरवाले चाहते हैं
02:16कि आपकी जल्दी से शादी हो जाए
02:18श्याम शर्मा जाता है और चुप हो जाता है
02:21इतने में राम कहता है
02:23रज्जो तुमने जाने की सारी तैयारी तो कर लिये ना
02:27कपड़े तो रख लिये ना
02:29थोड़े गरम कपड़े भी रख ले ना
02:31वहाँ ठंड होगी
02:32और जल्दी आने की कोशिश करना
02:35ठीक है मैं जल्दी आने की कोशिश करूँगी बस
02:39अगली सुबह दोनों जाने की तैयारी करने लगी
02:42राम उन्हें स्टेशन छोड़कर गर वापस आता है
02:45कुछ घंटों बाद रज्जो और सरस्वती गाउं पहुच जाते हैं
02:49रज्जो अपनी मा को देख कर बहुत खुश होती है
02:51मा आप अपना बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखती
02:54कितनी कमजोर हो गई हैं आप
02:56अगले दिन सरस्वती अपने घर वापस जाने लगती है
03:13तो लीलावती से कहती है
03:14बहन जी ध्यान रखना आप अपना
03:18आपकी तब्यद ठीक हो जाए
03:20तो आप भी रज्जो के साथ आ जाना
03:22रज्जो के बिना तो घर सुना सुना लगेगा
03:25अब सरस्वती अपने घर आ गई
03:28और घर की सारे जिम्मेदारी भी उस पर आ गई
03:31एक दिन वो कपड़े धोकर छट पर सुखाने जाती है
03:34बाल्टी में से टपकता पानी सीड़ियों को गिला कर दीता है
03:38और नीचे उतरते समय रज्जो की सास यानि की सरस्वती देवी का पैर फिसल जाता है और वो गिर जाती है
03:45लेकिन घर में कोई नहीं था
03:56सरस्वती जैसे तैसे अपने आपको संभालती जाकर कुर्सी पर बैठती है
04:01वो अपनी बहु के बारे में सोचती है
04:03अगर रज्जो होती तो मुझे संभाल लेती और घर भी संभाल लेती
04:08अब घर के काम कौन करेगा
04:11मैं डॉक्टर के पास कैसे जाओं बहुत दर्द हो रहा है
04:16जब राम और श्याम घर आते हैं
04:19तो अपनी मा की ऐसी हालत देख कर वो जल्दी से डॉक्टर को बलाते है
04:22डॉक्टर सरस्वती के पैर पर पट्टी बानता है और उसे आराम करने की सलह देता है
04:27राम कहता है
04:28मा आप बस आराम करो
04:31मैं रज्जो को खबर कर देता हूँ
04:32वो कल ही यहां आ जाएगी
04:34अरे रहने देना बेटा
04:36उसकी मा की तब्या ठीक नहीं है
04:38कुछ दिन में वो खुदी आ जाएगी
04:41उसे परेशान मत कर
04:42मा आप हमें श्याम की भी शादी कर देनी चाहिए
04:47कभी घर में कोई ऐसी परेशानी आती है
04:50तो कोई तो होगा घर संभालने वाला
04:52आप और रज्जो की घर के काम काज में मदद भी हो जाएगी
04:56कुछ समय बार श्याम की शादी सीमा सी हो गई
05:00लेकिन सीमा ने तो आती ही घर में गलेश शुरू कर दिया
05:04वो छूटी छूटी बातों पर लड़ती
05:06और उसे देख कर रज्जो का भी बरताव बदल गया
05:09एक दिन सीमा सुब उठने में लेट हो गई
05:12और रज्जो ने नाश्ता बना दिया
05:14सबी अपने काम पर चले गए
05:16जैसे ही सीमा अपने कमरे से आई तो रज्जो ने कहा
05:19तुम साफ सफाई कर लो
05:23मैं कपड़े दोने जा रही हूँ
05:25जल्दी काम हो जाएगा
05:26रज्जो की बात सुनते ही सीमा आग बबुला हो गई
05:30और कहने लगी
05:31आज मैं उटने में लेट क्या हो गई
05:33आप मुझे पर हुकम चलाने लगी
05:35मुझसे कोई इस तरह से बात करिये
05:38मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है
05:39अरे सीमा ये किस तरह की बात कर रही हो तुम मुझसे
05:43मैंने कोई हुकम नहीं दिया तुमे
05:45मैं तो बस काम को जल्दी खत्म करने की बात कर रही हूँ
05:48उन दोनों की नोग जोग सुनकर सरस्वती बहार आ जाती है
05:53और दोनों को समझाती है
05:54शाम को सब एक साथ खाना खाने लगे
05:57लेकिन खाने के बाद जब सब अपने कमरे में चले जाते हैं
06:02और खाने की टेबल पर थाली यूहीं छोड़ देते हैं
06:05सरस्वती को ये देख कर बहुत गुसा आता है
06:08वो दोनों बहुँँ को बुला कर कहती है
06:10तुम सब खाना खा कर चले गए
06:13अब ये बारतन कौन उठा कर रखेगा
06:16मेरे लिए छोड़ कर गई हो सारा काम
06:18तुम दोनों को शर्म नहीं आती
06:20अब दोनों बहुँए एक दुसरे को उपर बाट टालते हुए
06:24फिर लड़ने लगी
06:25ये देख सरस्वती परिशान हो गई
06:28उसने दोनों को डाटा और उन्हें अपने कमरे में भीज दिया
06:32सरस्वती ने जूठे बरतन धोए
06:34कुछ दिन इसी तरह चलता रहा
06:37अब दोनों सास की नजरों में एक दुसरे को गिराने में लग गई
06:41मा जी जब भावी फोन पर बात कर रही थी न
06:44तो कह रही थी मैं अपने बाएं की चली जाओंगी
06:47तो देखते हैं कि कौन काम करता है
06:49और यह हम सब की बुराई कर रही थी वो
06:51बहू किसे की बाद चुपके से सुनना गलत है न
06:55तुम आज के बाद आएसा मत करना
06:58अब तुम जाओ मैं रज्जो को समझा दूँगी
07:00सरस्वती ने रज्जो से बात करके उसे समझा दिया
07:04लेकिन रज्जो को अपनी देवरानी पर बहुत गुफसा आया
07:07अब वो भी सीमा की जुगली अपनी सास से करने लगी
07:10अगले दिन रज्जो अपनी सास की कमरे में जाती है और कहती है
07:14मैंने सीमा को बात करते सुना था
07:18वो देवर जिसे कहा रही थी कि अगर हम लोग अलग कहीं रहे तो हम ज्यादा खुश रहेंगे, रोज रोज की लडाईयों से भी बचेंगे।
07:26सरस्वती को इस बात पर गुसा तो बहुत आया, लेकिन उसनी कुछ कहा नहीं, जब दोनों बहुँ को लगा कि सरस्वती उनकी बातों में नहीं आने वाली, तो उन्होंने रिष्टेदारों और पडोसियों से एक दुसरे की चुगली करना शुरू कर दिया, जब सरस्वती को
07:56बडोसियों रिष्टेदारों को आने के लिए कैदो, और हवन के सारी तैयारी कर लो। हवन का दिना आ गया, पंडित जी रामायन का पाठ करने लगे।
08:26अंडित जी की बाद बहुत ध्यान से सुन रही थी और उनकी हां में हां मिला रही थी। ऐसे ही रामायन का पाठ अंतिम सीमा पर आ गया, जिसमें विभिशन के बारे में बताया गया था।
08:56जी बात कौन कर रहा है, जिसने घर में आती ही लड़ाया शुरू करवा दी।
09:00दोनों में फिर से नोग जोग शुरू हो गई।
09:04सरस्वती दोनों को चुप कर आते हुए बोली।
09:07अरे चुप हो जाओ तुम दोनों, पडोसी क्या कहेंगे, साब सुन रहा है तुमारी बात है।
09:13तब ही उनमें से एक पडोसन बोलती है।
09:15सरस्वती बहें, क्यूं चुप कर वा रही है वो अपनी बहो को।
09:21हमें तो इनके बारे में सब कुछ पता है।
09:24ये दोनों हमारे घर आकर एक दुसरे की चुगली करती है।
09:27तुमारे घर की हर छोटी से छोटी चीज पता है हमें।
09:32अंटी जी, हमने अपना समझ के आपको कुछ बता दिया।
09:36तो इसका मतलब ये नहीं कि आप सब के सामने हमारी सास से हमारी शिकायत करेंगी।
09:41आप तो सबसे बड़ी चुगल गोर हो।
09:43सीमा की बात सुनकर सभी पडोसन उन्हें बुरा भला कहने लगी।
09:47उनकी बाते सुनकर दोनों बहुए सब की सामने बहुत शर्मिंदा हुई।
09:52जब सब उनके घर चले गए तो सरस्वती ने अपनी बहुँँ से कहा।
09:57अब तुम दोनों को तो बहुत खुशी होगी कि सारे महले की आरते हमारे ही घर में खड़ी होकर हमें ही सुना कर चली गई।
10:07हमें काफी साल हो गए यहां रहते हुए।
10:10लेकिन आज तक किसी में भी इतनी हिम्मत नहीं थी कि हमसे उची आवाज में भी बोल पाए।
10:15लेकिन आज तुम दोनों के वज़ा से यह सब हमारी बुराई कर रहे हैं।
10:21तुम दोनों ने यह सब अच्छा नहीं किया।
10:24सीमा तुम्हारे इस घर में आने से पहले हम सब बहुत प्यार से रहते थे।
10:29लेकिन यह सब लड़ाया तुम्हारे आने की बात शुरू हुई है।
10:33आज के बाद तुमने घर में किसी से भी जगडा किया।
10:36तो मैं तुम्हें तुम्हारे माई के चोड़ाओंगा समझी तुम।
10:39यह बात सुनकर सीमा रोने लगी और सबसे माफी मांगने लगी।
10:59आप से कुछ कहने की हिम्मत नहीं करता। आज आपको इस बात का एसास को हो ही गया होगा।
11:05और अथी तो होती है जो मकान को घर बनाती है।
11:08अब बे कुछ नहीं बिगड़ा। आप दोनों प्यार से रहो। आपके पडोसी और रिष्टेदार अपने आप चुप हो जाएंगे।
11:15पंडी जी के बाद दोनों बहूं की समझ में आगी। अब दोनों प्यार से रहने लगी। इसी तरह समय बीद गया। अब पडोसी और ते उनकी प्यार की मिसाले देने लगी।
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