01:06ये है मैयूरा जिसका माईका और सिसुराल दोनों भी आस पड़ोस में
01:13तो मनिट की दोरी पर है
01:14जिसका पूरा पूरा फाइदा उठाते हुए
01:17मैयूरा हर दिन माईके के चक्कल लगाती रहती है
01:20हेलो मम्मी हाई भावी क्या बात है
01:24आज तो बड़े ही शाही और लजीज पकवान बने जा रहे
01:28कोई दावत शावत है क्या आज हमारे घर पर
01:31खुश बुआ आई नहीं के चली आगई महरानी चींचियों की तरह सूंती हुए
01:37अरे बेटा तेरे भाए का प्रमोशन हो गया है
01:42इसी खुशी में उसके मन पसंद पकवान बना रहे हैं बस
01:46आ जाती तू भी दमाजी और सम्धी सम्धन जी को भी न्याता दे दे
01:51पर ममी जी हमें थोड़ी ना पता था कि ये सब आएंगे
01:56मैंने तो वैसे भी खाना कम ही बनाया है
01:59क्या भाबी अब आपको ये तो पता है कि मेरा सिसुराल पडोस में ही है
02:04और आपको तो मैंने कहकर रखा है ना कि मेरे दो एक्स्ट्रा फूल के सेकर रख दिया करो
02:09मुझे मम्मी के हाथ की बनी सबजियां कितनी पर सुन्द है
02:12ओई बुड़ी मोहरानी
02:15ऐसे ही मयूरा आधा दिन अपने ससुराल में
02:19और आधा दिन अपने माईके में गुजारती रहती
02:22एक दिन सुबनाश्ति के दारान मयूरा के ससूर, धनराज और पतिश लो
02:27अरव मयूरा यह क्या यह पराठा तो आधा कच्चा है
02:32और मेरा पराठा तो कुछ ज्यादा ही एक्स्ट्रा पग्या है
02:35जो जल गया है कोईले से भी काला हो गया यह तो
02:38होगा भी क्यों नहीं
02:41यह करम जली सुबसारा काम ऐसे ही फटा फट गडबडी में जैसे तैसे निपटा कर अपने माय के भाग जाती है
02:48इससे क्या फर्क बढ़ता है सास को अगर चक्कर आ गए दिन दहाड़े है तब कौन आएगा बचाने
02:55ओ कमान माजी चक्कर और वो भी आपको दिन भर आप हर आदे गंडे में कुछ न कुछ खाती रहती हो और फिर भी मुझे ताने कस रही हो
03:05वेरी बैड तो कौन से गड़ है है आई वड़ी
03:10वहां माईके की घर में बंदना अपने पती याने मयूरा के भाई गोपाल से कहती है
03:15गोपाल तुम ना तुम्हारी प्यारी बेहन को समझा कर रखो
03:19अरे तीज त्योहार रक्षा बंदन दीपावली इन सब पे अपने माईके आए तो ठीक लगता है
03:25लेकिन ये मैड़म ये तो रोज ही चली आती है मूँ उठा है
03:28अरे सूचे मॉमी जी अगर मैं भी रोज इस तरह अपने माईके जाओ
03:32तो आपको ये सही लगेगा नहीं ना फिर
03:35बंदना सही कह रही है मॉमी जरा इस बात पर गार फरमाईए
03:40हाँ बेटा मुझे पता है उस दिन तो गली की औरतें भी सबजी वाले के यहां गपे लड़ाती हुए बाते बना रही थी
03:48कि मयूरा तो दिन भर सिर्फ अपने माईके में ही रहती है
03:52आज उसे आने दो मीठे बोल से ही समझाओंगी समझ जाएगी वो
03:58फिर जब मयूरा माईके आती है तो
04:00ममी आपको तो कोई दिक्कत नहीं है न मेरे इस तरह आप से मिलने यहां आने से
04:09ये देख सरुच का मन ममता के मुझ में आ जाता है
04:16ना बेटी ना तू ऐसा क्यों सोच रही है और तेरी आखे नम क्यों है तू क्यों रो रही है बेटा समझाओंगी ने कुछ कहा है क्या
04:27उफो ये ममे जी भी ना उन्होंने एक आँसों गिराया नहीं कि पिखल गई
04:33और इसी के साथ सरोज अपनी बेटी को कुछ नहीं बोल पाती
04:48और अब मयूरा का माईके में आना जाना इतना बढ़ जाता है
04:52कि वो माईके के फैसलों में भी दकल अंदाजी देने लगती है
04:55तब ही वहाँ पर बर्खा आती है
04:58अगर इतना ही परेशान हो तो उसे घर के अंदर आने ही क्यों देते हो
05:03वो एक पाउँ अपने माईके की नाव में रखती है और एक पाउँ अपने सिस्राल की नाव में
05:09अगर एक नाव हटा दे तो ना चाहते हुए भी उसे दोनों पेर एक ही नाव में रखने होंगे न
05:28वो सब नहीं पता हो, अब उसका पूरा संसार उसके सिसुराल में बस चुका है, उसे वहाँ ध्यान देना चाहिए, ना कि इधर माईके में, और इसलिए आप ही हो, उसे यहाँ आने पर आप ही को रोक टोक लगानी होगी, बस यही कहने आई थी, नामस्ते, अगले दिन, सिस�
05:58छोड़ कर निकम में कहीं कि, रात में जब धनराज और श्लोक दफ्तर से घर लाटते हैं, तब वो देखते हैं कि मयूरा घर पर नहीं है, और बर्खा अपने कमरे में बुखार से तप रही है, और तो और घर में कुछ खाना तक नहीं बनाया है, आज तो हदी कर्दी मयूर
06:28कुछ देर बाद मयूरा अपने ससुराल वापस आती है, मयूरा घड़ी देखे तुमने, हाँ, घड़ी में दो सुया, एक साथ कितने प्यारी लगती है न, बिल्कुल आपकी और मेरी जोड़ी की तरह, मैं मजा के मुड में बिल्कुल नहीं हूं मयूरा, तुम्हारा ये मा
06:58अंदाजा भी है, मा अंदर 103 बुखार से तप रही है, और तुम सुबह से अपने माईके में हो, बहु, अच्छा होगा कि तुम माईके जाना कम कर दो, वन्हा कहीं ऐसा ना हो, कि एक दिन दोनों तरफ की रिष्टों की डोर तूट जाए, और तुम बीच में ही लटकी रह
07:28पर मयूरा तो आखिर मयूरा है, इतनी जल्दी कैसे उसी किसी की बात समझ में आ जाती, ये तो उसके डिक्ष्णरी में था ही नहीं, पहले वो बिना कोई काम किये माईके चली जाती थी, और अब कभी कूकर को गेस पर रखकर, तो कभी कपड़ों को आधे में धूता छोड
07:58मिशाने थी, अब तो आस-पास की आड़तों के लिए भी मयूरा अच्छी खासी, शान की चाई की गौसिप बन गई थी, अरे वो सरोज बेहन की बिटिया मयूरा, कभी इस डाली तो कभी उस डाली फुदकती रहती है, मुझे तो दिन भर अपनी खिड़की से उसका ये सरक
08:28पर मानना पड़ेगा सरोज को, बहुत अच्छे गुण दिये हैं उसने अपनी बेटी को
08:36तबी वहाँ से गुज़र रही सरोज, सभी औरतों की बातों को कान लगा कर सुन लेती है, और रुक कर उन्हें चिलाती हुए कहती है
08:46क्यों रही कलम मुईयों, तुम लोगों को क्या अपनी घर ग्रहस्ती नहीं है, जो रोज शाम को हमारी ग्रहस्ती की चर्चा लेकर बैठ जाती हो, हैं, बेवकूफ औरते, पहले खुद के घर में ठीक से देख लो, फिर दोसरे के घरों में जाको
09:01क्यों सल्ला बेहन, आपका बेटा तो रोज रात को नशे में धुत लुड़कता हुआ घर बापस आता है न, हमने कभी कुछ बोला, और जानकी बेहन, आपकी बेटी का इस महिने का पांचवा बॉइफ्रेंड उसे रोज गली की कोने पर छोड़ने आता है, लेकिन हमने तो
09:31साथ मिलकर मयूरा के बारे में बात करते हैं, शलोक हमने बहुत बार कोशिश की कि हम मयूरा को रोके माई के आने से, लेकिन वो इतनी धीट है कि हमारी बातों को कान के पीछे ही डाले जा रही है, अब पता नहीं वो ये सब जान बुचकर कर रही है या पिर सच में, सम्तन �
10:01सरोज जी
10:31लेटर दिया गया था, वो भी दुगनी सेलरी के बिजिस पर, लेकिन एक साल पहले आई इस ओफर को मैंने मयूरा की खुश्यों के लिए ठुकरा दिया था, क्योंकि अगर हम यहां से कहीं और जाकर शिफ्ट हो गए, तो वो अपने माई के को मिस्स करेगी, तभी शादी भ
11:01और फिर हम सब यहां से चले जाएंगे, अब हम और कर भी क्या सकते हैं, अगर मयूरा को अपने माई के जाने से रोकना है, तो बैतर यही होगा कि उसके पड़ोस के सिसुराल को दूर ले जाए, और उसके सिसुराल वाले ही अलग जाकर रहे हैं, जिससे वो रोज अपने मा
11:31जो भी को, सही माइनों में बहु विदा करके तो मैं अब लाई हूँ
Be the first to comment