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  • 3 weeks ago

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00:00कामना अपने छोटे से परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के सोन भद्र शहर में रहती है।
00:05हाल ही में वो अपने बेटे श्लोक के शादी नंदिनी नाम की लड़की से करा देती है।
00:11मगर शादी के बाद अपने बेटे में आएं बदलाव को भुस्विका नहीं कर पाती।
00:17बेटा श्लोक, आज तो ऑफिस से घार इतनी जल्दी कैसे आ गया।
00:23क्या करता मा, नंदिनी जित कर रही थी तो आना पड़ा।
00:27तो क्या बहु रोज आफिस से जल्दी आने को बोलेगी और तो आज आएगा।
00:31ऐसी बात नहीं है मा, दरसल वो चाती है कि आज हम कहीं बाहर घूमने चले।
00:37तो बस इसलिए मैं मना नहीं कर पाया और आ गया।
00:41श्लोक की ये बात एक आमना को जरा भी रास नहीं आती और वो बिना कुछ बोले अपने कमरे में चली जाती है।
00:48मा की इस व्यवार को देखकर श्लोक भी सोच में पड़ जाता है।
00:52ये मा को अचानक क्या हो गया है।
00:54श्लोक सोची राहा होता है तबी वहाँ नंदिनी आ जाती है।
00:58श्लोक आप आगे हाफिस से।
01:00अब तुमने इतने प्यार से बुलाया तो कैसे नहीं आता।
01:06तो श्लोक सहब आज हम डिनर भी बाहर ही करेंगी।
01:12अरे लेकिन मा…
01:14मा को भी साथे ले चलते हैं न, वो होंगी तो और भी ज़्यादा मजाएगा।
01:18श्लोक और नंदिनी कामना की कमरे में जाते हैं।
01:21मा आप तयार हो जाईए, हम सब आज बाहर गुमने चल रहे हैं।
01:25क्या सच में तुम लोग मुझे भी अपने साथ लेकर चल रहे हो।
01:30तो और क्या, हम लोग आपके बिना कहीं जा सकते हैं बला।
01:34शेलीना मम्मी जी अप फटाफट से तयार हो जाईए आप।
01:37कमना जट से तयार होकर श्लोक और नंदिनी के साथ चल दीती है।
01:41तीनों मार्केट के लिए निकल पड़ते हैं।
01:44जहां रास्ते में नंदिनी इस लोग का हाथ पकड़ती हुए चलती है।
01:47अपने बेटे और बहु को इस तरह साथ चलता देख।
01:51कामना उन्हें टोकती है।
01:53अरे हाथों में हाथ डाल कर क्यों चल रहे हो तुम दोनों।
01:56ये तुम दोनों का बेडरूम नहीं हमारी गली है, महला है।
01:59जहां लोग एक चीज देखते हैं और चार बाते बोलते हैं।
02:03अब भी ना मम्मी, नंदिनी मेरी बीवी है, अब उसका हाथ नहीं पकड़ूँगा, तो फिर किसका पकड़ूँगा।
02:09और फिर लोगों के बारे में सोचना ही क्यों है।
02:12हाँ हाँ, अब मेरी बात कहां मानोगे तुम, बीवी जो आ गई है तुमारी।
02:18कामना की बातों से दोनों का दिल दुख जाता है, और पूरी रास्ते वो दोनों एक दूसरी से दूरी बना कर चलते हैं, अगले दिन।
02:39नंदिने, खाना बना की नहीं, बहुत भूग लग रही है। वैसे भी लाई दो मिनिट में।
02:46अरे जल्दी कर पहू, मेरे बेटे को आफिस के लिए लेट भी हो रहा है।
02:51कामना आगे कुछ बोलती, इससे पहले ही नंदिनी सभी के लिए खाना ले आती है।
02:58सारी, आज तो मैं आफिस के लिए देर हो गई। वो क्याना, मैं आज तुम्हारे पसंद की पाउभाजी बना रही थी।
03:05आज से पहले मैंने कुभी बनाई नहीं न, इसलिए थोड़ा टाइम लग गया।
03:09एक पाउभाजी बनाने में तुने इतने घंटे लगा दिये, और मुझ से बोल दिया होता, मैं बना देती है अपने बच्चे के लिए पाउभाजी।
03:18वैसे भी न, श्लोक को सिर्फ मेरे हाथ की पाउभाजी ही पसंद है। किसी और की पाउभाजी की तरब तो वो देखता तक नहीं।
03:27कामना की इन बातों से एक बार फिर नंदिनी निराश हुजाती है। तबी नंदिनी को दुखी देख श्लोक कहता है।
03:35मा, आप ये क्या बोले जा रही है। नंदिनी, प्लेस जल्दी से खाना देदो, फिर मुझे आफिस के लिए भी तो निकलना है।
03:43नंदिनी श्लोक और अपनी सास के लिए खाना लगाती है।
04:13क्या हुआ मा, कोई बात है क्या, आप कुछ नाराज सी लग रही है।
04:18नहीं बहुए ऐसी कोई बात नहीं है, तो जाकर श्लोक के आफिस का टिफिन पाक कर दे, मैं जरा अपने कमरे में जाकर आराम करती हूँ।
04:26नंदिनी को अपनी सास की बातों में हलका सा रूठा पर नजर आता है।
04:32लेकिन वो अपनी सास में आये इस बदलाव का कारण नहीं समझ पाती।
04:36इसी तरह कुछ दिन बीच जाते हैं।
04:39अब कामना को अपने बेटी के मूँ से नंदिनी की तारीफ सुनना जरा भी अच्छा नहीं लगता।
04:46एक दिन
04:46अरे कामना बेहन कैसी हो आज तो बड़े दिनों बात दिखी।
04:52अब क्या बताओ तुम्हें आज कल तो कहीं जाने का मानी नहीं करता।
04:57सारा दिन बस बिस्तर पर ही आराम करती रहती हूं।
05:00सच में बेहन तुम्हारा तु भागये चमक गया नंदिनी जैसी बहू पाकर।
05:05आर एक मेरी बहू को देख लो। बिस्तर तो छोड़ो और सोफे पर भी चैन से नहीं बैटने देती।
05:12कामना और शालीनी बात कर रहे होते हैं तब ही उदर नंदिनी भी आ जाती है।
05:17वो पीछे खड़ी होकर उनकी बाते सुनने लगती है।
05:22इस मामले में तो मेरी बहू बहुत अच्छी है पर।
05:27पर क्या कोई बात है क्या और तो इतने दुखी क्यों लग रही है।
05:32आर नहीं नहीं बस ऐसे कोई खास बात नहीं है।
05:36अब बता भी दे कामना क्या पता मैं तेरी कोई मदद कर सकूँ।
05:42तुम्हें पता है जब से नंदिनी मेरे घर में आई है ना तब सेश लोग पहले जैसा नहीं रहा।
05:49अब वो बहुत बदल चुका है। और तो और अब उसे मेरे हाथ का खाना भी पसंद नहीं।
05:55दिन राज जब देखो बस अपनी बीवी के गुणगान करता रहता है।
06:00तु इस बात से परिशान है। तेरा लड़का तो तब भी ठीक है। जरा मेरे घर आकर देखियो किसे दिन।
06:08बीवी के पैर दबाता नजर आएगा तुझे मेरा बेटा।
06:12कामना आगे कुछ नहीं कहती। वो चुपचाप अपने घर लोट जाती है।
06:17वहीं उनके पीछे खड़ी नंदिनी अपने सास के दिल की बाते जानकर अचंभे में पढ़ जाती है।
06:23उसे अपने कानों सुने बातों पर यकीन नहीं होता।
06:26वो सोचने लगती है कि आखिर वो ऐसा क्या करे जिस से उसकी सास की शिकायती दूर हो सके।
06:33नंदिनी कहा हो तुम। देखो मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट लेकर आया हूँ।
06:38क्या है इसमें। तुम खोल कर खुदी देखलो।
06:42नंदिनी गिफ्ट खोल कर देखती है। वाव। यह तो बहुत सुन्दर नेकलेस है।
06:48मैं जानता था तुम्हें ये नेकलेस जरूर पसंद आएगा।
06:51अचानक से नंदिनी की नजर दूर खड़ी अपनी सास पर जाती है।
06:56उसे अपनी सास की कही बाते याद आ जाती है।
07:00श्लोक ये तुम मम्मी जी को दे दो प्लीस। मैं क्या करूंगी इसका।
07:04तुम तु जानती ही हो मुझे इन सब का कुछ खास शौक भी नहीं है।
07:08तुम ऐसे क्यों बोल रही हो नंदिनी ? क्या तुम्हें ये हार पसंद नहीं आया।
07:12हार चीक है पर कुछ खास भी नहीं है। मुझे ये ज्यादा पसंद नहीं आया।
07:17आप एक काम कीजिए न, ये हार आप मम्मी जी को दे दीजिए।
07:21शौक गुसे में अपना पैर पटकता हुआ वहाँ से चला जाता है।
07:25कुछ ही देर बाद नंदिनी सभी को खाने के लिए आवाज देती है।
07:29नंदिनी सभी की थालियों में खाना परुस्ती है।
07:33नंदिनी, ये आज कैसा खाना बनाया है तुमने? इसमें तो जरा भी स्वाद नहीं है।
07:39हाँ बहु, इसमें तो नामाक, मिर्च, मसाले, कुछ भी नहीं है।
07:44शायद मैं भूल गए हूंगे ममी जी, मुझे माफ कर दीजी।
07:49लगता है तुम खाना बनाना भूल चुकी हो नंदिनी।
07:52मा, क्या आप दूसरा खाना बना देंगी? बहुत समय हो गया है, आपके हाथ का कुछ खाया भी नहीं है।
07:58कामना जट से रस्वे में जाकर खाना बनाने लगती है।
08:01आधे घंटे बाद कामना सभी के लिए खाना बना कर लिया आती है, जिसे वो सबसे पहले श्लोक को देती है।
08:07वाँ मा, आज कितने दिनों बाद आपके हाथों का खाना खाया है।
08:12आपके हाथों में आज भी वही स्वाद है, जो पहले हुआ करता था।
08:16अपने बेटे के मुँझ से इतनी दिनों बार तारिफ सुनकर, कामना आज बेहत खुश होती है।
08:22नंदिनी भी ये सब देखकर मन ही मन बहुत खुश होती है।
08:25खुश भी क्यों न हो, आखिर कार उसकी मैनत रंग जो ला रही है, अगले दिन।
08:31मा, आज भी प्लीज आप ही खाना बना दीजिये। कल के बाद तो नंदिनी के हाथ का खाना खाने का मन ही नहीं कर रहा।
08:38हाँ हाँ बेटा, क्यों नहीं, मैं अभी तेरे फेवरेट आलो के पराठे बना कर लाती हूँ।
08:44कामना अब खुश रहने लगी थी, और खुश भी क्यों नहो, अब उससे उसका पहली वाला बेटा जो मिल गया था, लेकिन जितना श्लोक अपने मा के करीब आ रहा था, उतना ही वो नंदिनी से दूर होता चला जा रहा था, कामना को भी अब उन दोनों के बीच की ये दू
09:14जहां वो देखती है कि नंदिनी श्लोक की चाई में जान बुचकर चीनी की जगर नमक डाल रही थी, अरे ये क्या कर रही है नंदिनी, तुमने श्लोक की चाई में नमक क्यों मिलाया, वो माजी मेरा ध्यान नहीं था, क्यों जूट बोल रही है बहु, मैंने देखा तुने
09:44आपको लगता है ना मेरे आनी के बाद से श्लोक आपसे दूर हो गए हैं।
09:47तो बस मैं उन्हें फिर से पहले वाला श्लोक बनाना चाहती थी।
09:52अपनी बहु के मुँझे ये सब सुनकर कामना की आखे भराती है।
09:56तुझे ये सब किस ने बताया पगली।
10:00उस दिन मैं जब मार्केट जा रही थी तब मैंने आपकी सारी बाते सुन ली थी ममी जी।
10:05मतलब तुम मेरे कारण अपना बसा बसाया घर तबाह करने चली थी।
10:11मुझे माफ कर दे बहु मुझे से बहुत बड़ी भूल हो गई।
10:15मेरा बेटा तेरा पती भी है इस बात को मैं भूली चुकी थी।
10:20और उसमें आये बदलाओ को स्विकार ही नहीं कर पा रही थी।
10:24लेकिन आप मुझे समझ में आ चुका है कि समय के साथ-साथ ये बदलाओ भी जरूरी होता है।
10:32कोई बात नहीं ममी जी मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है सच मुझे मैं बहुत भागेशाली हूँ जो मुझे तेरे जैसी बहु मिली चल आप पटा पट सेश लोग के लिए एक बढ़िया सी गर्मा गरम चाय बना दे और हाँ नमक वाली नहीं चीनी वाली
10:51जी ममी जी रसोई के बाहर खड़ाश लोग दोनों की सारी बाते सुन लेता है और मुस्करा कर वहाँ से चला जाता है आप कामना जी को दोनों से कोई शिकायत नहीं होती और तीनों खुशी खुशी साथ रहते हैं
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